क्या है भारत और मालदीव के बीच विवाद की असली वजह , जाने पूरी खबर

मालदीव में चुनाव के बाद नई सरकार के आने से ही भारत और मालदीव के बीच रिश्ते सामान्य नहीं रहें हैं मालदीव और चीन की बढ़ती नजदीकियों से भारत चिंतित

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भारत और मालदीव का रिश्ता

भारत और मालदीव के संबंध बहुत पुराने रहे हैं ,1988 में उग्रवादियों द्वारा मालदीव में तख्तापलट करने की कोशिश की गई थी जिसमें अब्दुल्ला लूथफई के नेतृत्व में मालदीव का एक समूह तथा श्रीलंका से पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम से एक तमिल अलगाववादी संगठन शामिल था जिसे भारतीय सेना ने आपरेशन कैक्टस चलाकर नाकाम किया था ।भारतीय नौसेना के युद्धपोत गोदावरी और बेतवा ने श्रीलंकाई तट के पास मालवाहक जहाज को रोक लिया और भाड़े के सैनिकों को पकड़ लिया।

2014 में भारत ने आपरेशन नीर को‌ चला कर मालदीव को पेयजल संकट से निपटने में मदद की थी।

कोविड 19 के दौरान भी भारत ने आपरेशन संजीवनी के तहत मालदीव को‌ महामारी से निपटने में मदद की थी।

भारत के लिए मालदीव के क्या मायने हैं

भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र, विशेषकर श्रीलंका, पाकिस्तान तथा मालदीव जैसे देशों में चीन की बढ़ती उपस्थिति पर चिंता व्यक्त की है। इन क्षेत्रों में चीनी-नियंत्रित बंदरगाहों एवं सैन्य सुविधाओं के विकास को भारत के रणनीतिक हितों व क्षेत्रीय सुरक्षा के लिये एक चुनौती के रूप में देखा गया है।
ऐसे में भारत ने मालदीव और अन्य हिंद महासागर देशों के साथ अपने राजनयिक व रणनीतिक संबंधों को मज़बूत किया है। इसने संबद्ध क्षेत्र में अपने व्यापक प्रभाव के लिये आर्थिक सहायता प्रदान की है, आधारभूत अवसंरचना परियोजनाएँ शुरू की हैं एवं रक्षा सहयोग का विस्तार किया है।
भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति का उद्देश्य अपने पड़ोसी देशों में चीन की बढ़ती उपस्थिति को संतुलित करना है।

मालदीव हिन्द महासागर में स्थित एक टोल की तरह है इस द्वीप शृंखला के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में संचार के दो महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्थित हैं।

रिश्ते बिगड़ने का कारण

मालदीव के चीन समर्थक रुख़ से भारत और मालदीव के रिश्तों में बदलाव आया है जो कि पहले की सरकार भारत की तरफ झुकाव था । इस बदलाव से भारत अपने पड़ोसी देशों में बढ़ते चीनी प्रभाव‌ से चिंतित हैं तथा वहां पर इंडिया आउट अभियान चलाया जा रहा है

नई सरकार के आने के बाद से मालदीव ने कई भारत विरोधी कार्य किए हैं ऐसे में मालदीव के कुछ नेताओं द्वारा भारत के प्रधानमंत्री के‌‌ ऊपर विवादित बयान देकर संबंधो को असमान्य किया है जो कि प्रधानमंत्री ने भारतीय लोगों से लक्ष्यद्वीप में घूमने की‌ अपील की थी। जिसके बाद कई फिल्मी कलाकारों ने भी लक्ष्यद्वीप पर प्रधानमंत्री का समर्थन किया था।

भारत को इस समय कई‌ ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे अपने पड़ोसी देशों में बढ़ते चीनी प्रभाव‌ कम किया जा सके। भारत को अपने पड़ोसी देशो के संबंध में बहु-ध्रुवीय और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने की अपनी पुरानी परंपरा को ध्यान में रखते हुए एक उदार रुख अपनाना चाहिये।

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